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IISGNII गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरः गुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः

परलोक-पुनर्जन्मांक (Parlok-Punarjanm-Ank)-GITA PRESS

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मनुष्यमात्र को पतनकारी आसुरी सम्पदा के दोषों से सदा दूर रहने तथा परम विशुद्ध उज्ज्वल चरित्र होकर सर्वदा सत्कर्म करते रहने की शुभ प्रेरणा के साथ इस में परलोक तथा पुनर्जन्म के रहस्यों और सिद्धान्तों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है। आत्मकल्याणकामी पुरुषों तथा साधकमात्र के लिये इसका अध्ययन-अनुशीलन अति उपयोगी है।

This volume presents an exhaustive principle of rebirth and existence of other world. The volume includes various real stories of persons who were reborn in this world. The persons desirous of self-realization and true strivers must go through this volume for their own benefaction

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