IISGNII गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरः गुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः

श्रीमद्भगवद्गीता साधक संजीवनी, मराठी (Shrimadbhagvadgita Sadhak Sanjeevani, Marathi)-GITA PRESS

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स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज ने गीतोक्त जीवन की प्रयोगशाला से दीर्घकालीन अनुसंधान द्वारा अनन्त रत्नों का प्रकाश इस टीका में उतार कर लोक-कल्याणार्थ प्रस्तुत किया है, जिससे आत्मकल्याणकामी साधक साधना के चरमोत्कर्ष को आसानी से प्राप्त कर आत्मलाभ कर सकें। इस टीका में स्वामी जी की व्याख्या विद्वत्ता-प्रदर्शन की न होकर सहज करुणा से साधकों की कल्याणकामी है। विविध आकार-प्रकार, भाषा, आकर्षक साज-सज्जा में उपलब्ध यह टीका सद्गुरू की तरह सच्ची मार्गदर्शिका है।

This is an excellent commentary on Shrimad-Bhagvad-Gita by Swami ji. Swami Ramsukhdas ji has searched out many secrets and valuable jewels of spiritual ideas from the unfathomable sea of Shrimad-Bhagvad-Gita for the welfare of public at large, studying which they may easily attain highest bliss. Revered Swami ji has written this commentary not to propound any philosophical view-point or to show-off his erudition but he has made this fine endeavour for the spiritual benefit of the practising strivers. This commentary, available in different sizes, languages and attractive forms, has proved itself as a Guru just like a true guide.

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